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कलयुग की साधना chanting

कलयुग की साधना
F/g+/t @ Dwarkadhish pandaji

कलयुग के मतलब कलह- क्लेस का युग

नाम से ही स्पष्ट होता है। यह ऐसा युग है जो दुसरो के बुरा सोचे।

दुख हो असांत हो।

कलयुग से बचने का एक ही उपाय है। और वह है भगवान का नाम जाप।

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*कलयुग से बचने के उपाय🌹🌹*

कलियुग से बचने का एक बहुत ही आसान रास्ता है। बहुत ही आसान मार्ग है लेकिन हम ये भी नहीं कर पाते हैं। केवल और केवल भगवान का नाम। तभी तो गाया गया है।

*कलियुग केवल नाम अधारा❗ सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा‼*

भावार्थ :-

             इस कलयुग में भगवान का नाम ही आधार है। केवल नाम सुनने से , जपने से मानव भाव सागर से उतर जाता है।

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एक और कमाल की बात है नाम जप में किसी विधि विधान , देश , काल , अवस्था की कोई बाधा नहीं है। किसी प्रकार से , कैसी भी अवस्था में , किसी भी परिस्थिति में , कहीं भी , कैसे भी नाम जप किया जा सकता है। इस नाम जप से हर युग में भक्तों का भला हुआ।

हाँ.. शायद मन्त्र में कोई नियम हो सकता है लेकिन भगवान के नाम में कोई भी बाधा नहीं है। इसलिए खूब नाम जपो।

हमारे यहाँ चार युग हुए हैं। उन चारों में भगवान की प्राप्ति का मार्ग अलग अलग था।वह इस प्रकार है।

1. *सतयुग🌹*

सतयुग में सभी जगह सत्य था। जब भी कोई आत्मा ध्यान में बैठती प्रभु का याद करते उसे प्रभु की प्राप्ति हो जाती थी।

2. *त्रेतायुग🌹*

त्रेतायुग में यज्ञ का बहुत महत्व था। उस युग में यज्ञ द्वारा ही प्रभु की प्राप्ति होती थी। राजा दसरथ जी की कोई संतान नहीं थी। पर जब उन्होने यज्ञ  करवाया तो उन्हें प्रभु श्री राम की प्राप्ति हुई।

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3. *द्वापरयुग🌹*

द्वापर युग में प्रभु की प्राप्ति  तपस्या से होती थी। लोग कई कई वर्ष प्रभु को पाने के लिये तपस्या करते थे।

4. *कलयुग🌹*

सभी युग में प्रभु की प्राप्ति के लिए अलग - अलग उपाय थे।

और कठिन भी

पर इस कलयुग में काम और समय को देखकर कोई भी ऐसी कठिन परिश्रम करने में असफल है।

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इसलिए इस कलयुग में सबसे बड़ा जाप प्रभु का नाम जाप है

तो दोस्तों कितना सरल है। लेकिन क्या प्रभाव है जो हमें नाम नहीं लेने देता। इसका उपाय भी नाम लेना ही है। हर समस्या का हल भगवान का नाम लेने से होता है। पर इसमें आपकी श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए। हम जीव हैं। हमारी आयु कम है, समय भी बहुत कम है। संसार के भी बहुत काम हमें करने होते हैं। दिन रात सुबह शाम हर समय हम बिजी रहते हैं। कोई न कोई काम जरूर रहता है। हम यज्ञ नहीं कर सकते हैं, जप नहीं कर सकते हैं, तप नहीं कर सकते हैं लेकिन नाम तो ले ही सकते हैं। भगवान का लिया हुआ नाम कभी भी खाली नहीं जाता है, फिर आप चाहे कैसे भी लें। गीता में तो यहाँ तक लिख दिया है कि तुम्हें यदि यज्ञ करना है तो जप यज्ञ करो, यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि – सम्पूर्ण यज्ञोंमें जपयज्ञ) भगवान के नाम का जप करना भी एक यज्ञ है उसे जपयज्ञ(Jap Yagya) कहते हैं।

और फिर तुलसीदास जी ने हमें पूरी छूट दे दी है कि

भायँ कुभायँ अनख आलस हूँ❗ नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ‼

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अर्थ :–

           प्रेम-भाव से, बैर-भाव से, क्रोध-भाव से या आलस्य-भाव से, किसी भी प्रकार से नाम जप दसों दिशाओं में मंगलकारी है।

ये भी कह दिया तुम सारे दिन अपने काम में व्यस्त हो, नाम नहीं ले पा रहे हो भगवान का, तो भी कोई बात नहीं। जब सोने जाओ और सब काम से निवृत हो चुके हो यदि नींद नहीं आ रही हो उस समय सिर्फ भगवान को भजो। जो भी आपके इष्ट हो, जिससे भी आपको प्यार हो। राम, कृष्ण, हनुमान, शिव, माँ दुर्गा, या जो भी आपको निकट लगे आप उस नाम का जप करो।

और कितनी छूट चाहोगे यारो। मुझे नहीं लगता इससे ज्यादा छूट हमें दी जा सकती है। केवल भगवान का नाम काफी है।

जय द्वारकाधीश🌹🌹

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Mo :~ 8511028585

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